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मुगल सम्राट हुमायूँ: संघर्ष, निर्वासन और पुनर्स्थापना की अद्भुत गाथा

मुगल सम्राट हुमायूँ: संघर्ष, निर्वासन और पुनर्स्थापना की अद्भुत गाथा

प्रस्तावना

मुगल साम्राज्य के दूसरे शासक नासिरुद्दीन मुहम्मद हुमायूँ का जीवन संघर्ष, असफलताओं, निर्वासन और अंततः पुनरुत्थान की प्रेरक कहानी है। यद्यपि उसका शासनकाल निरंतर युद्धों और राजनीतिक चुनौतियों से भरा रहा, फिर भी हुमायूँ ने मुगल परंपराओं को जीवित रखा और अपने उत्तराधिकारी अकबर के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया। इतिहास में हुमायूँ को एक सौम्य स्वभाव, विद्वान-प्रिय और कला-संरक्षक शासक के रूप में भी याद किया जाता है।


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मुगल सम्राट हुमायूँ: संघर्ष, निर्वासन और पुनर्स्थापना की अद्भुत गाथा

प्रारंभिक जीवन और उत्तराधिकार

हुमायूँ का जन्म 6 मार्च 1508 ई. को काबुल में हुआ। वह मुगल संस्थापक बाबर का ज्येष्ठ पुत्र था। बाबर की मृत्यु (1530) के बाद हुमायूँ गद्दी पर बैठा, लेकिन उसके सामने एकीकृत और स्थिर साम्राज्य नहीं था। मध्य एशिया की परंपरा के अनुसार बाबर ने अपने प्रदेशों को पुत्रों में बाँट दिया, जिससे हुमायूँ की सत्ता स्वाभाविक रूप से कमजोर हो गई।


आरंभिक शासन और चुनौतियाँ

हुमायूँ के शासन के आरंभिक वर्षों में सबसे बड़ी समस्या थी—अफगान सरदारों का उभार, विशेषकर शेरखान (शेरशाह सूरी)। इसके अतिरिक्त, उसके भाइयों—कामरान, अस्करी और हिंदाल—की महत्वाकांक्षाएँ भी आंतरिक अस्थिरता का कारण बनीं। हुमायूँ का स्वभाव उदार और विलंबप्रिय था, जिससे निर्णयों में ढील दिखाई देती थी।


शेरशाह सूरी से संघर्ष

हुमायूँ और शेरशाह सूरी के बीच संघर्ष निर्णायक सिद्ध हुआ।

  • चौसा का युद्ध (1539): हुमायूँ को पराजय मिली।
  • कन्नौज/बिलग्राम का युद्ध (1540): पुनः पराजय, जिसके बाद हुमायूँ को भारत छोड़ना पड़ा।

इन पराजयों के साथ ही भारत में सूरी शासन की स्थापना हुई और मुगल सत्ता अस्थायी रूप से समाप्त हो गई।


निर्वासन का काल (1540–1555)

हुमायूँ का निर्वासन काल अत्यंत कठिन रहा। वह सिंध, बलूचिस्तान होते हुए ईरान पहुँचा, जहाँ ईरान के शाह तहमास्प ने उसे शरण दी। ईरान में रहते हुए हुमायूँ ने फारसी संस्कृति, प्रशासन और कला से गहरा प्रभाव ग्रहण किया। इसी काल में उसने फारसी अधिकारियों और सैनिकों की सहायता प्राप्त की, जो आगे चलकर मुगल प्रशासन में महत्वपूर्ण सिद्ध हुए।


काबुल और कंधार की पुनर्प्राप्ति

ईरानी सहायता से हुमायूँ ने पहले कंधार और फिर काबुल पर अधिकार किया। यह उसकी राजनीतिक पुनर्स्थापना का प्रारंभ था। धीरे-धीरे उसने अपनी सैन्य शक्ति को संगठित किया और भारत की ओर पुनः बढ़ने की योजना बनाई।


भारत में मुगल सत्ता की पुनर्स्थापना

1555 ई. में हुमायूँ ने पंजाब पर अधिकार किया और सरहिंद के युद्ध में अफगानों को पराजित किया। इसके साथ ही दिल्ली और आगरा पर पुनः मुगल शासन स्थापित हो गया। यह उपलब्धि इसलिए महत्वपूर्ण थी क्योंकि यह दर्शाती है कि हुमायूँ ने अपनी गलतियों से सीखकर रणनीतिक सुधार किए।


प्रशासन और नीतियाँ

हुमायूँ का प्रशासनिक ढाँचा उसके अल्पकालिक पुनर्स्थापित शासन के कारण पूरी तरह विकसित नहीं हो सका, फिर भी कुछ विशेषताएँ उल्लेखनीय हैं:

  • फारसी संस्कृति का प्रभाव: दरबार, प्रशासन और साहित्य में फारसी परंपराएँ।
  • विद्वानों और कलाकारों का संरक्षण: इतिहासकारों, चित्रकारों और कवियों को प्रोत्साहन।
  • धार्मिक सहिष्णुता: विभिन्न मतों के प्रति उदार दृष्टिकोण।


कला, साहित्य और स्थापत्य

हुमायूँ स्वयं विद्या-प्रेमी था। उसके काल में फारसी साहित्य को संरक्षण मिला। यद्यपि उसकी मृत्यु के बाद बना हुमायूँ का मकबरा (दिल्ली) अकबर के काल में निर्मित हुआ, फिर भी यह मुगल स्थापत्य की दिशा निर्धारित करने वाला स्मारक माना जाता है।


व्यक्तित्व और मूल्यांकन

इतिहासकारों के अनुसार हुमायूँ एक आदर्शवादी, दयालु और विद्वान शासक था, परंतु राजनीतिक दृढ़ता की कमी उसके शासन की कमजोरी बनी। फिर भी, उसके निर्वासन और पुनरागमन ने मुगल साम्राज्य को नई सांस्कृतिक दिशा दी।


मृत्यु

27 जनवरी 1556 ई. को दिल्ली के पुराना किला स्थित पुस्तकालय की सीढ़ियों से गिरकर हुमायूँ की मृत्यु हो गई। उसके बाद उसका पुत्र अकबर मुगल सम्राट बना और साम्राज्य को अभूतपूर्व ऊँचाइयों तक पहुँचाया।


ऐतिहासिक महत्व

हुमायूँ का महत्व इस बात में निहित है कि उसने मुगल साम्राज्य को पूरी तरह समाप्त होने से बचाया। उसके प्रयासों और अनुभवों ने अकबर के लिए एक सुदृढ़ और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध साम्राज्य की नींव रखी।


निष्कर्ष

हुमायूँ का जीवन हमें सिखाता है कि असफलता अंतिम नहीं होती। संघर्ष, धैर्य और सीखने की क्षमता से खोई हुई सत्ता भी पुनः प्राप्त की जा सकती है। मुगल इतिहास में हुमायूँ का स्थान एक संघर्षशील पुनर्निर्माता के रूप में सदैव स्मरणीय रहेगा।


📝 MCQ: हुमायूँ (20 प्रश्न)

Q1. हुमायूँ का पूरा नाम क्या था?

A) नासिरुद्दीन मुहम्मद हुमायूँ
B) जलालुद्दीन हुमायूँ
C) बाबर हुमायूँ
D) शेर मुहम्मद हुमायूँ
✅ उत्तर: A

Q2. हुमायूँ का जन्म कब हुआ?

A) 1500 ई.
B) 1505 ई.
C) 1508 ई.
D) 1510 ई.
✅ उत्तर: C

Q3. हुमायूँ किस मुगल सम्राट का पुत्र था?

A) अकबर
B) बाबर
C) जहाँगीर
D) शाहजहाँ
✅ उत्तर: B

Q4. चौसा का युद्ध कब हुआ?

A) 1535
B) 1539
C) 1540
D) 1542
✅ उत्तर: B

Q5. कन्नौज के युद्ध में हुमायूँ को किसने हराया?

A) बाबर
B) राणा सांगा
C) शेरशाह सूरी
D) अकबर
✅ उत्तर: C

Q6. हुमायूँ को किस देश में शरण मिली?

A) तुर्की
B) अफगानिस्तान
C) ईरान
D) उज्बेकिस्तान
✅ उत्तर: C

Q7. हुमायूँ ने भारत में सत्ता कब पुनः स्थापित की?

A) 1540
B) 1545
C) 1555
D) 1556
✅ उत्तर: C

Q8. हुमायूँ की मृत्यु कैसे हुई?

A) युद्ध में
B) बीमारी से
C) विषपान से
D) सीढ़ियों से गिरकर
✅ उत्तर: D

Q9. हुमायूँ के बाद सम्राट कौन बना?

A) हुमायूँ द्वितीय
B) अकबर
C) जहाँगीर
D) शेरशाह
✅ उत्तर: B

Q10. हुमायूँ के काल में किस संस्कृति का प्रभाव बढ़ा?

A) अरबी
B) फारसी
C) तुर्की
D) भारतीय
✅ उत्तर: B

Q11–Q20 (संक्षेप में)

  1. हुमायूँ का शासन प्रारंभ – 1530

  2. हुमायूँ का निर्वासन काल – 1540–1555

  3. शेरशाह सूरी का संबंध – अफगान शासक

  4. हुमायूँ का मकबरा – दिल्ली

  5. मकबरा किसने बनवाया – हमीदा बानो बेगम

  6. पुनर्स्थापना का युद्ध – सरहिंद

  7. हुमायूँ का स्वभाव – उदार

  8. प्रशासन की भाषा – फारसी

  9. पुस्तकालय दुर्घटना – पुराना किला

  10. ऐतिहासिक भूमिका – पुनर्निर्माता शासक

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