भारत में पुर्तगालियों का आगमन और प्रभाव: व्यापार से साम्राज्य तक
भूमिका
भारत में पुर्तगालियों का आगमन यूरोपीय शक्तियों में सबसे पहले हुआ और इसी ने भारत-यूरोप समुद्री संपर्क की नींव रखी। 15वीं शताब्दी के अंत में पुर्तगाल ने समुद्री खोजों में अग्रणी भूमिका निभाई। 1498 ई. में वास्को-दा-गामा के कालीकट पहुँचने से न केवल मसाला व्यापार का नया मार्ग खुला, बल्कि भारत में यूरोपीय राजनीतिक व सांस्कृतिक हस्तक्षेप की शुरुआत भी हुई।
भारत में पुर्तगालियों का आगमन और प्रभाव: व्यापार से साम्राज्य तक
पुर्तगालियों के भारत आगमन के कारण
- मसालों की माँग – काली मिर्च, दालचीनी, जायफल की यूरोप में भारी माँग
- स्थल मार्गों से मुक्ति – अरब व तुर्क व्यापारियों के नियंत्रण से बचना
- व्यापारिक लाभ – सोना-चाँदी व विलासिता वस्तुओं का आयात
- ईसाई धर्म का प्रसार – धार्मिक उद्देश्य
- समुद्री शक्ति का विस्तार – हिंद महासागर पर नियंत्रण
वास्को-दा-गामा का भारत आगमन (1498)
1498 ई. में वास्को-दा-गामा अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप को पार कर कालीकट (केरल) पहुँचा। उस समय कालीकट पर जमोरिन का शासन था।
महत्व:
- भारत-यूरोप सीधा समुद्री मार्ग स्थापित
- मसाला व्यापार में क्रांति
- अन्य यूरोपीय शक्तियों के लिए मार्ग प्रशस्त
पुर्तगालियों का भारत में विस्तार
अल्फोंसो-द-अल्बुकर्क की भूमिका
पुर्तगाली साम्राज्य के वास्तविक निर्माता अल्फोंसो-द-अल्बुकर्क थे।
मुख्य उपलब्धियाँ:
- 1510 में गोवा पर अधिकार
- नौसैनिक अड्डों की स्थापना
- किलों का निर्माण (गोवा, दीव, दमन)
प्रमुख केंद्र
- गोवा (राजधानी)
- दीव
- दमन
- बेसिन (वसई)
- कोचीन
प्रशासनिक व्यवस्था
- वायसराय प्रणाली – गोवा से शासन
- कठोर नौसैनिक कानून
- व्यापार पर राज्य नियंत्रण
- कार्टेज प्रणाली – भारतीय जहाजों से कर वसूली
व्यापारिक नीतियाँ
- मसालों पर एकाधिकार
- बलपूर्वक व्यापार
- स्थानीय व्यापारियों पर दबाव
- अरब व्यापारियों से संघर्ष
धार्मिक नीति और ईसाईकरण
पुर्तगालियों का प्रमुख उद्देश्य ईसाई धर्म का प्रसार था।
विशेषताएँ:
- चर्च और मिशनरियों की स्थापना
- सेंट फ्रांसिस जेवियर की भूमिका
- जबरन धर्मांतरण के उदाहरण
- गोवा इनक्विज़िशन (धार्मिक दमन)
सांस्कृतिक प्रभाव
सकारात्मक प्रभाव
- छापेखाने की शुरुआत
- आधुनिक शिक्षा का विकास
- स्थापत्य कला (चर्च, कैथेड्रल)
- नई फसलों का आगमन (आलू, मिर्च, तंबाकू)
नकारात्मक प्रभाव
- धार्मिक असहिष्णुता
- स्थानीय परंपराओं का दमन
पुर्तगालियों का पतन
कारण:
- सीमित जनसंख्या व संसाधन
- अंग्रेज़ और डचों से प्रतिस्पर्धा
- भ्रष्ट प्रशासन
- स्थानीय विरोध
धीरे-धीरे पुर्तगाली शक्ति सिमटती गई, हालाँकि गोवा 1961 तक उनके अधीन रहा।
ऐतिहासिक महत्व
- यूरोपियों में प्रथम आगमन
- औपनिवेशिक युग की शुरुआत
- समुद्री व्यापार का नया युग
- भारत के सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन पर स्थायी प्रभाव
निष्कर्ष
भारत में पुर्तगालियों का आगमन इतिहास का एक महत्वपूर्ण मोड़ था। यद्यपि उनका शासन सीमित रहा, परंतु उनके द्वारा स्थापित समुद्री मार्ग, व्यापारिक नीतियाँ और सांस्कृतिक प्रभाव भारत के इतिहास में गहराई से जुड़े हुए हैं।
MCQ – भारत में पुर्तगाली (20 प्रश्न)
Q1. भारत आने वाले पहले यूरोपीय कौन थे?
A) अंग्रेज़ B) फ्रांसीसी C) पुर्तगाली D) डच
👉 उत्तर: C
Q2. वास्को-दा-गामा भारत कब पहुँचा?
👉 उत्तर: 1498
Q3. वास्को-दा-गामा भारत के किस बंदरगाह पर पहुँचा?
👉 उत्तर: कालीकट
Q4. उस समय कालीकट का शासक कौन था?
👉 उत्तर: जमोरिन
Q5. गोवा पर पुर्तगालियों ने कब अधिकार किया?
👉 उत्तर: 1510
Q6. गोवा पर किस पुर्तगाली ने अधिकार किया?
👉 उत्तर: अल्फोंसो-द-अल्बुकर्क
Q7. पुर्तगालियों की राजधानी कहाँ थी?
👉 उत्तर: गोवा
Q8. कार्टेज प्रणाली किससे संबंधित थी?
👉 उत्तर: समुद्री व्यापार कर
Q9. पुर्तगालियों का मुख्य व्यापार क्या था?
👉 उत्तर: मसाले
Q10. पुर्तगालियों का प्रमुख धार्मिक उद्देश्य क्या था?
👉 उत्तर: ईसाई धर्म का प्रसार
Q11. गोवा इनक्विज़िशन किससे संबंधित थी?
👉 उत्तर: धार्मिक दमन
Q12. भारत में छापेखाना किसने शुरू किया?
👉 उत्तर: पुर्तगालियों ने
Q13. भारत में आलू और मिर्च किसके द्वारा लाए गए?
👉 उत्तर: पुर्तगालियों द्वारा
Q14. दीव और दमन किस यूरोपीय शक्ति के अधीन थे?
👉 उत्तर: पुर्तगाली
Q15. पुर्तगालियों के पतन का प्रमुख कारण क्या था?
👉 उत्तर: प्रतिस्पर्धा व सीमित संसाधन
Q16. सेंट फ्रांसिस जेवियर किससे संबंधित थे?
👉 उत्तर: ईसाई मिशनरी
Q17. पुर्तगालियों का मुख्य नौसैनिक आधार कहाँ था?
👉 उत्तर: गोवा
Q18. भारत में पुर्तगाली शासन कब तक रहा?
👉 उत्तर: 1961
Q19. पुर्तगालियों की प्रशासनिक व्यवस्था क्या कहलाती थी?
👉 उत्तर: वायसराय प्रणाली
Q20. पुर्तगालियों के आगमन का सबसे बड़ा ऐतिहासिक महत्व क्या था?
👉 उत्तर: यूरोपीय औपनिवेशिक युग की शुरुआत

0 टिप्पणियाँ